​नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने 10वीं और 12वीं के छात्रों के हित में एक ऐतिहासिक और बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड परीक्षाओं के नतीजों के बाद उत्तर पुस्तिकाओं (Answer Sheets) के पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) की फीस को लेकर देश भर में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद सीबीएसई ने अपने कड़े रुख में ढील दी है। बोर्ड द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, अब छात्रों को प्रति प्रश्न रीवैल्यूएशन के लिए ₹100 के बजाय केवल ₹25 की फीस देनी होगी।
​इसके साथ ही, बोर्ड ने एक और क्रांतिकारी राहत की घोषणा की है— यदि रीवैल्यूएशन की प्रक्रिया में छात्र का एक नंबर भी बढ़ता है, तो बोर्ड द्वारा ली गई पूरी फीस छात्र के बैंक खाते में वापस (Refund) कर दी जाएगी। सीबीएसई के इस यू-टर्न को देश भर के लाखों छात्रों, अभिभावकों और छात्र संगठनों की एक बड़ी जीत के रूप में देखा जा रहा है।
​क्या था पूरा विवाद और क्यों सड़क पर उतरे थे छात्र?
​हाल ही में सीबीएसई ने 10वीं और 12वीं कक्षा के बोर्ड परीक्षा परिणाम घोषित किए थे। परिणाम आने के बाद हर साल की तरह कई ऐसे छात्र थे जो अपने अंकों से संतुष्ट नहीं थे। उन्हें पूरा भरोसा था कि उन्होंने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया है, लेकिन मार्किंग स्कीम या मानवीय त्रुटि के कारण उनके नंबर कम आए हैं।
​जब इन छात्रों ने पुनर्मूल्यांकन (Re-evaluation) के लिए आवेदन करना चाहा, तो सीबीएसई की महंगी फीस संरचना (Fee Structure) उनके सामने एक बड़ी दीवार बनकर खड़ी हो गई। बोर्ड ने प्रति प्रश्न रीवैल्यूएशन के लिए ₹100 की फीस तय कर रखी थी। इसका सीधा मतलब यह था कि यदि कोई छात्र किसी एक विषय में 5 प्रश्नों के पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करता है, तो उसे ₹500 खर्च करने पड़ते। यदि कोई छात्र 2 या 3 विषयों के कई प्रश्नों को चुनौती देना चाहता था, तो यह खर्च हजारों में पहुंच रहा था।
​इस महंगी प्रक्रिया के खिलाफ दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई समेत देश के कई बड़े शहरों में छात्रों और अभिभावक संघों ने मोर्चा खोल दिया। सोशल मीडिया पर #LowerCBSEFee और #JusticeForCBSEStudents जैसे हैशटैग टॉप ट्रेंड करने लगे। छात्र संगठनों का तर्क था कि सीबीएसई जैसी सरकारी और स्वायत्त संस्था को शिक्षा का व्यवसायीकरण नहीं करना चाहिए। गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के होनहार छात्र सिर्फ पैसों की कमी के कारण अपने अंक सुधरवाने से वंचित रह रहे थे, जो उनके भविष्य और कॉलेज एडमिशन के साथ सरासर अन्याय था।
​सीबीएसई का नया आदेश: फीस में 75% की भारी कटौती
​चौतरफा दबाव और शिक्षा मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद आखिरकार सीबीएसई प्रबंधन को अपनी गलती का अहसास हुआ और बोर्ड ने रीवैल्यूएशन नीति में आमूल-चूल बदलाव करने का फैसला किया।
​बोर्ड द्वारा जारी नए सर्कुलर के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
​फीस में बड़ी राहत: प्रति प्रश्न रीवैल्यूएशन की फीस को ₹100 से घटाकर सीधे ₹25 कर दिया गया है। यानी अब छात्रों को पुरानी फीस के मुकाबले 75% कम भुगतान करना होगा।
​'एक नंबर' वाला रिफंड नियम: सबसे बड़ा और स्वागत योग्य बदलाव यह है कि यदि रीवैल्यूएशन के बाद छात्र के मूल प्राप्तांक में केवल 1 नंबर की भी बढ़ोतरी होती है, तो आवेदन के समय जमा की गई पूरी राशि (100% Refund) छात्र को वापस कर दी जाएगी।
​पारदर्शिता पर जोर: बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि फीस वापसी की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी। परिणाम संशोधित होते ही रिफंड की राशि सीधे उसी खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी, जिससे ऑनलाइन भुगतान किया गया था।
​"गलती बोर्ड की, तो सजा छात्र क्यों भुगते?" – इस तर्क ने बदली बाजी
​इस पूरे आंदोलन के दौरान अभिभावकों और शिक्षाविदों ने एक बेहद मजबूत तर्क बोर्ड के सामने रखा था। उनका कहना था कि अगर किसी छात्र का नंबर रीवैल्यूएशन में बढ़ता है, तो इसका सीधा मतलब यह है कि पहली बार कॉपी जांचने वाले क्रेडेंशियल/मूल्यांकनकर्ता (Evaluator) ने गलती की थी।
​जब गलती सीबीएसई के आधिकारिक परीक्षक की है, तो उसके सुधार के लिए छात्रों से मोटी फीस क्यों वसूली जानी चाहिए? इस तर्क ने बोर्ड के अधिकारियों को सोचने पर मजबूर कर दिया। नए नियम के तहत, यदि छात्र का दावा सही साबित होता है और उसके नंबर बढ़ते हैं, तो बोर्ड अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पूरी फीस वापस करेगा। यह नियम परीक्षकों (Examiners) को भी अधिक सतर्कता और जिम्मेदारी से कॉपियां जांचने के लिए मजबूर करेगा।
​इस फैसले का छात्रों के भविष्य पर क्या पड़ेगा असर?
​सीबीएसई के इस फैसले से विशेष रूप से उन छात्रों को सीधा फायदा मिलेगा जो दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) या अन्य शीर्ष विश्वविद्यालयों में कट-ऑफ या सीयूईटी (CUET) के अंकों के आधार पर एडमिशन की रेस में शामिल हैं।
​उच्च शिक्षा में दाखिले के लिए अक्सर 1-1 नंबर की मारामारी होती है। दशमलव के अंकों से भी छात्रों का मनपसंद कॉलेज छूट जाता है। पुरानी व्यवस्था में, कई गरीब छात्र चाहकर भी अपनी कॉपियां दोबारा नहीं जंचवा पाते थे क्योंकि उनके पास फीस देने के पैसे नहीं होते थे। अब मात्र ₹25 प्रति प्रश्न की दर से कोई भी छात्र बिना किसी आर्थिक बोझ के अपने अधिकारों के लिए दावा ठोक सकेगा। इससे मूल्यांकन प्रणाली में छात्रों का विश्वास और मजबूत होगा।
​छात्र संगठनों और अभिभावकों ने जताई खुशी, कहा- "देर आए, दुरुस्त आए"
​बोर्ड के इस फैसले के बाद देश भर के छात्र कैंपसों में जश्न का माहौल है। ऑल इंडिया पेरेंट्स एसोसिएशन (AIPA) के अध्यक्ष ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा:
​"यह न्याय की जीत है। हम लंबे समय से कह रहे थे कि रीवैल्यूएशन फीस को कमाई का जरिया नहीं बनाया जाना चाहिए। ₹25 की फीस बेहद तार्किक है और 'एक नंबर बढ़ने पर रिफंड' का नियम ऐतिहासिक है। इससे मूल्यांकन प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और परीक्षकों की जवाबदेही तय होगी।"
​वहीं, बोर्ड परीक्षा देने वाले कई छात्रों ने इसे मानसिक तनाव से मुक्ति देने वाला फैसला बताया है। छात्रों का कहना है कि अब वे बिना डरे और बिना माता-पिता पर वित्तीय बोझ डाले अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच करवा सकेंगे।
​निष्कर्ष: भविष्य के लिए एक नजीर
​सीबीएसई का यह कदम देश के अन्य राज्य बोर्डों (State Boards) और उच्च शिक्षा परिषदों के लिए भी एक नजीर (Example) बनेगा। शिक्षा का मुख्य उद्देश्य छात्रों का मूल्यांकन करना और उन्हें आगे बढ़ने के सही अवसर देना है, न कि प्रशासनिक प्रक्रियाओं के नाम पर उन पर आर्थिक बोझ डालना। सीबीएसई ने यह साबित कर दिया है कि एक संवेदनशील बोर्ड हमेशा अपने छात्रों की आवाज सुनता है और समय रहते सुधार करने की क्षमता रखता है।