गुरुग्राम। साइबर सिटी गुरुग्राम का सबसे व्यस्त और अक्सर ट्रैफिक के भारी दबाव के कारण बदनाम रहने वाला 'राजीव चौक' जल्द ही पूरी तरह से बदलने वाला है। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने राजीव चौक पर लगने वाले परमानेंट ट्रैफिक जाम और गाड़ियों के बढ़ते दबाव को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक मेगा मास्टर प्लान तैयार कर लिया है। इस नए प्लान के तहत राजीव चौक पर दो नए एडिशनल फ्लाईओवर (ग्रेड सेपरेटर) बनाए जाएंगे, जो सीधे दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे और सोहना हाईवे के ट्रैफिक को बिना किसी बाधा के आपस में जोड़ेंगे।
​इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब ₹250 करोड़ की लागत आने का अनुमान है। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद दिल्ली, जयपुर, सोहना और गुरुग्राम के स्थानीय इलाकों के बीच सफर करने वाले लाखों वाहन चालकों को रोजाना के थकाऊ जाम से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।
​क्यों पड़ी नए फ्लाईओवर की जरूरत?
​राजीव चौक गुरुग्राम का सबसे मुख्य और क्रिटिकल मोबिलिटी नोड है। यह चौराहा दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे (NH-48), सोहना हाईवे और दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को आपस में जोड़ता है। वर्तमान में यहां एक फ्लाईओवर और अंडरपास पहले से मौजूद हैं, जिन्हें बनाने में भी भारी भरकम बजट खर्च किया गया था। इसके बावजूद, साल 2023 में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के खुलने के बाद से इस जंक्शन पर वाहनों का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ गया है।
​मौजूदा चौराहे के डिजाइन में एक बड़ी कमी यह है कि सोहना हाईवे की तरफ से आने वाले वाहनों को दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर जाने के लिए नीचे उतरना पड़ता है। वहां उन्हें सिग्नल पर इंतजार करना पड़ता है और फिर राइट टर्न लेकर दिल्ली की तरफ आगे बढ़ना होता है। इसी तरह दिल्ली की तरफ से आने वाले वाहन भी जंक्शन के नीचे ऑटो-रिक्शा, बसों और स्थानीय ट्रैफिक के कारण फंस जाते हैं। एक्सप्रेसवे का तेज रफ्तार ट्रैफिक और लोकल ट्रैफिक एक ही जगह आपस में मर्ज होने की वजह से यहां भयंकर चोक पॉइंट बन जाता है। पीक आवर्स के दौरान इस एक अकेले चौराहे को पार करने में लोगों को 20 से 30 मिनट तक का समय लग जाता है।
​NHAI का मेगा प्लान और दोनों फ्लाईओवरों के रूट्स
​NHAI की द्वारका प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटेशन यूनिट (PIU) इस पूरे प्रोजेक्ट को लीड कर रही है। नए प्लान के अनुसार, जंक्शन के जमीनी स्तर पर ट्रैफिक के टकराव को रोकने के लिए अलग और समर्पित एलिवेटेड रास्ते दिए जा रहे हैं।
​पहला फ्लाईओवर (सोहना से दिल्ली-जयपुर एक्सप्रेसवे रूट): यह फ्लाईओवर सोहना रोड की तरफ से शुरू होगा और नीचे के पूरे राजीव चौक गोलचक्कर व सिग्नल को पार करते हुए दिल्ली-गुड़गांव एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-15 की तरफ जाकर उतरेगा। इससे सोहना से दिल्ली जाने वाले लोगों को नीचे जाम में रुकने की बिल्कुल जरूरत नहीं पड़ेगी।
​दूसरा फ्लाईओवर (सेक्टर-32 से सोहना हाईवे रूट): यह फ्लाईओवर मुख्य रूप से सेक्टर-32 और उसके आसपास से आने वाले भारी ट्रैफिक को सुचारू रूप से संभालेगा। इसके जरिए वाहन सीधे सोहना हाईवे पर चढ़ सकेंगे, जिससे स्थानीय सेक्टर्स के लोगों को लंबी कतारों से राहत मिलेगी।
​भविष्य की परियोजनाओं का भी रखा गया है ध्यान
​NHAI इस प्रोजेक्ट के डिजाइन को बेहद आधुनिक तरीके से तैयार कर रहा है। इस रूट पर भविष्य में आने वाले रैपिडएक्स (RapidX) सेमी-हाई-स्पीड रेल स्टेशन को भी ध्यान में रखा गया है, जो राजीव चौक के बेहद करीब प्रस्तावित है। नए फ्लाईओवरों की नींव और पिलर्स का खाका इस तरह तैयार किया जा रहा है ताकि भविष्य में रैपिडएक्स के निर्माण में कोई बाधा न आए और दोनों का अलाइनमेंट सुरक्षित रहे।
​इसके साथ ही, हाईवे पर पैदल यात्रियों की सुरक्षा के लिए लिफ्ट और रैंप की सुविधा वाले फुट ओवरब्रिज (FOB) बनाने और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (GMDA) के साथ मिलकर ड्रेनेज सिस्टम को बेहतर बनाने की योजना पर भी सहमति बनी है।
​रियल एस्टेट सेक्टर को मिलेगा बड़ा बूस्ट
​राजीव चौक पर लगने वाले जाम से मुक्ति का सीधा असर गुरुग्राम के रियल एस्टेट मार्केट पर भी देखने को मिलेगा। इंफ्रास्ट्रक्चर के इस बड़े अपग्रेड से सोहना रोड बेल्ट, सुभाष चौक, सेक्टर-15, 32, 33, 47, 48, 49 और 70 जैसे इलाकों की कनेक्टिविटी दिल्ली-NCR से बेहद स्मूथ हो जाएगी।
​प्रॉपर्टी एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो कामकाजी लोग जाम की वजह से इन इलाकों में घर खरीदने से कतराते थे, वे अब यहां निवेश को प्राथमिकता देंगे। सुगम सफर की वजह से इन पॉश सेक्टर्स में आवासीय और कमर्शियल संपत्तियों की मांग के साथ-साथ उनके प्रीमियम और रेंटल वैल्यू में भी अच्छी तेजी आने की पूरी उम्मीद है।
​वर्तमान स्थिति और आगे की राह
​NHAI के अधिकारियों के अनुसार, यह मेगा प्रोजेक्ट फिलहाल प्रारंभिक प्लानिंग और संरेखण (Alignment Phase) के चरण में है। विस्तृत डिजाइन तैयार होने के बाद इसकी डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) को अंतिम मंजूरी दी जाएगी। इसके साथ ही स्थानीय नागरिक निकायों के साथ मिलकर उपयोगिता पाइपलाइनों (Utility Pipelines) को शिफ्ट करने की रूपरेखा भी बनाई जा रही है।
​हालांकि निर्माण कार्य शुरू होने के बाद कुछ समय के लिए रूट डायवर्जन और कंस्ट्रक्शन की वजह से लोगों को थोड़ी परेशानी हो सकती है, लेकिन एक बार प्रोजेक्ट के पूरा हो जाने के बाद गुरुग्राम का यह सबसे बड़ा सिरदर्द हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा।