डिजिटल दुनिया में तेजी से बदलती तकनीक और यूजर्स की बढ़ती जरूरतों के बीच अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स भी अपने बिजनेस मॉडल में बड़ा बदलाव करने की तैयारी में हैं। दुनिया की सबसे बड़ी टेक कंपनी Meta (मेटा) के स्वामित्व वाले प्लेटफॉर्म—वॉट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम—जल्द ही अपने ‘प्लस’ या प्रीमियम वर्जन लॉन्च कर सकते हैं। इन नए वर्जन में यूजर्स को कई एडवांस फीचर्स मिलेंगे, लेकिन इसके लिए उन्हें मासिक या वार्षिक शुल्क भी देना पड़ सकता है।
सूत्रों के अनुसार, यह कदम कंपनी की बढ़ती कमाई के नए स्रोत तलाशने की रणनीति का हिस्सा है। अब तक ये प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से विज्ञापनों के जरिए कमाई करते थे, लेकिन अब सीधे यूजर्स से सब्सक्रिप्शन फीस लेने का मॉडल भी अपनाया जा सकता है।

क्या होंगे प्लस वर्जन के खास फीचर्स?
सबसे बड़ा बदलाव स्टोरी फीचर में देखने को मिल सकता है। अभी तक वॉट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर स्टोरी 24 घंटे बाद अपने आप हट जाती है, लेकिन प्लस वर्जन में यह सीमा खत्म की जा सकती है। यानी यूजर अपनी स्टोरी को 24 घंटे से ज्यादा समय तक रख सकेगा, या उसे मैन्युअली हटाने का विकल्प मिलेगा।

इसके अलावा, यूजर्स को ‘फेवरेट कॉन्टैक्ट्स’ या ‘कस्टम ऑडियंस लिस्ट’ बनाने की सुविधा भी दी जा सकती है। इस फीचर के जरिए यूजर अलग-अलग लोगों के लिए अलग-अलग स्टोरी या पोस्ट शेयर कर पाएगा। उदाहरण के लिए, एक स्टोरी सिर्फ परिवार के लिए, दूसरी दोस्तों के लिए और तीसरी ऑफिस के लोगों के लिए अलग-अलग दिखाई जा सकेगी।

प्राइवेसी और कंट्रोल होगा ज्यादा मजबूत
प्लस वर्जन में प्राइवेसी फीचर्स को भी और मजबूत किया जाएगा। यूजर्स को यह कंट्रोल मिलेगा कि कौन उनकी प्रोफाइल देख सकता है, कौन उनकी स्टोरी देखे और कौन नहीं। इसके साथ ही ‘रीड रिसीट’ (ब्लू टिक) और ‘ऑनलाइन स्टेटस’ को और बेहतर तरीके से मैनेज करने के ऑप्शन भी मिल सकते हैं। इसके अलावा, चैट कस्टमाइजेशन, एड-फ्री एक्सपीरियंस और बेहतर डेटा सिक्योरिटी जैसे फीचर्स भी प्रीमियम यूजर्स के लिए उपलब्ध हो सकते हैं।

कंटेंट क्रिएटर्स को मिलेगा फायदा
इंस्टाग्राम और फेसबुक पर कंटेंट बनाने वाले क्रिएटर्स के लिए यह बदलाव काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। प्लस वर्जन में उन्हें अपने फॉलोअर्स को एक्सक्लूसिव कंटेंट दिखाने का विकल्प मिलेगा, जिससे वे सब्सक्रिप्शन के जरिए कमाई भी कर सकेंगे। यह मॉडल पहले से ही कई प्लेटफॉर्म्स पर सफल रहा है, और अब Meta इसे अपने इकोसिस्टम में भी लागू करने की योजना बना रही है।

क्या आम यूजर्स पर पड़ेगा असर?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या आम यूजर्स को इन सेवाओं के लिए भुगतान करना पड़ेगा? फिलहाल कंपनी का फोकस ‘फ्रीमियम मॉडल’ पर रहने का अनुमान है। यानी बेसिक फीचर्स पहले की तरह मुफ्त रहेंगे, जबकि एडवांस फीचर्स के लिए भुगतान करना होगा। इससे उन यूजर्स को फायदा मिलेगा जो ज्यादा कंट्रोल, प्राइवेसी और एक्स्ट्रा सुविधाएं चाहते हैं, जबकि सामान्य यूजर्स बिना भुगतान के भी प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकेंगे।

भारत में क्या होगा असर?
भारत जैसे बड़े बाजार में यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यहां करोड़ों लोग रोजाना वॉट्सएप, फेसबुक और इंस्टाग्राम का इस्तेमाल करते हैं। अगर प्लस वर्जन लॉन्च होता है, तो यह देखना दिलचस्प होगा कि कितने यूजर्स इसके लिए पैसे देने को तैयार होते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में कम कीमत पर सब्सक्रिप्शन प्लान लाकर Meta ज्यादा से ज्यादा यूजर्स को आकर्षित करने की कोशिश कर सकती है।

निष्कर्ष
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का यह नया कदम डिजिटल दुनिया में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है। जहां एक ओर यूजर्स को बेहतर फीचर्स और कंट्रोल मिलेगा, वहीं दूसरी ओर उन्हें इसके लिए भुगतान भी करना पड़ सकता है। अब देखना यह है कि यूजर्स इस नए मॉडल को कितना स्वीकार करते हैं और Meta इसे किस तरह से लागू करती है। आने वाले समय में यह बदलाव सोशल मीडिया के उपयोग के तरीके को पूरी तरह बदल सकता है।